अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की महान विशेषता है-सुबोध उनियाल

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अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की महान विशेषता है-सुबोध उनियाल

हमारा देश एक विशाल राष्ट्र है। इसके नागरिक नाना प्रकार की जाति और उप जातियों में हैं और विभिन्न सम्प्रदायों और धर्मो को मानने वाले हैं। अनेकता में एकता भारतीय संस्कृति की महान विशेषता है। यही सद्भावना एक भावनात्मक एकता की आधारशिला है। विभिन्न जातियों, समुदायों और धर्मो के बावजूद हमारा जनमानस एक ऐसी संस्कृति और एकता के सूत्र में बंधा है जो अपने आप में बेजोड़ है।
बुद्धिजीवी फाउंडेशन की 18 वीं राज्य स्तरीय सेमिनार
” *अनेकता में एकता- हमारी संस्कृति “* में मुख्य अतिथि श्री सुबोध उनियाल कबीना मंत्री उत्तराखंड सरकार
उक्त विचार सुबोध उनियाल ने कहीं और उक्त कार्यक्रम में उत्तराखंड की विभिन्न विभूतियों को उत्तराखंड को उत्तराखंड रत्न सम्मानित किया और कहा कि जिन विभूतियों को यह सम्मान मिला है उनका दायित्व समाज के प्रति और भी अधिक हो जाता है और उम्मीद है कि वह अपनी इस दायित्व को भली-भांति संभालेंगे |
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंजीनियर नरेंद्र सिंह ने की |संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ एस फारुख में कहा किहमारे देश भारत में सभी धर्मों के लोग निवास करते हैं ये लोग बहु भाषा-भाषी है। इनकी इन विषमताओं को देखकर कोई भी बाहरी व्यक्ति यह समझ सकता है अथवा ठसे सन्देह हो सकता है कि भारत एक देश न होकर छोटे छोटे खण्डों का विशाल जन समूह है। जहाँ प्रत्येक की अपनी पृथक्-पृथक् संस्कृति अथवा सभ्यता है। किन्तु इन प्राकृतिक एवं सामाजिक स्तर की विभिन्नताओं में एकता की एक कभी न टूटने वाली ऐसी कड़ी है जिसकी हम अपेक्षा नहीं कर सकते। यही कारण है कि तमाम विद्वान् यह कहने को बाध्य हो जाते हैं कि अनेकता में एकता है हिन्द (भारत) की विशेषता।
विशिष्ट अतिथि
ने कहा कि भारत अनेक धर्मों, जातियों व भाषाओं का देश है और अनेकता में एकता की भावना ही इसकी विशेषता है। इसमें जब कभी भी देश की अखंडता को खंडित करने का कुप्रयास किया जाता है तो यहां का एक-एक नागरिक सजग हो उठता है। ऐसे में राष्ट्रीय एकता के लिए प्रयत्नशील होने से पूर्व हमें राष्ट्र का स्वरूप जान लेना चाहिए। राष्ट्रीयता की जड़ें राष्ट्र की भूमि में जितनी गहरी होंगी राष्ट्रीय भावों का अंकुरण उतना ही पल्लवित होगा।
विशिष्ट अतिथि डॉ आशुतोष सयाना ने कहा कि हमारे देश में सभी प्रेम और सदभाव से रहते है. एक दूसरे की धर्म और भाषाओं का आदर करते है. … हमारे देश में प्रतिदिन कोई ना कोई त्यौहार या जयंती मनाई जाती है जो कि अलग-अलग धर्म और जाति के लोगों की आस्था होती है फिर भी सभी लोग मिलजुल कर यह त्यौहार मनाते है. इसीलिए हमारे भारत देश में अनेकता में भी एकता की झलक दिखाई देती है |
कार्यक्रम में
विशाल शर्मा समाजसेवी अनिल कुमार त्रिपाठी, ज्वाइंट डायरेक्टर ट्रेंनिंग एंड एंप्लॉयमेंट विभाग ,मोहम्मद मुस्तफा खान जिला पंचायती राज अधिकारी देहरादून ,
कविता चौधरी जोशी योगाचार्य ,वरिष्ठ पत्रकार ब्रह्मदत्त शर्मा, डॉक्टर आलोक जैन,
कृष्णा शर्मा अध्यापक , वरिष्ठ अधिवक्ता ओ0पी0 सकलानी ,डॉक्टर सना उमर,
डॉ अजहर जावेद वरिष्ठ सर्जन ,वेल्मेद हॉस्पिटल देहरादून ,को उत्तराखंड रत्न से सम्मानित किया गया |
कार्यक्रम में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के पूर्व अध्यक्ष सुशीला बलूनी, ब्रिगेडियर के जी बहल, सुनील अग्रवाल, पदम सिंह, मोहम्मद उमर ,राजू वर्मा, सौरभ कुमार, कविता शर्मा ,अरुणाभ निधि, सुभाष वोहरा, ने अपने विचार व्यक्त किए |
कार्यक्रम का संचालन संस्था के सचिव हर्ष शर्मा ने किया |

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